ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति -1

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति -1

सृष्टि , ब्रह्माण्ड , universe ये कैसे बने , ये धरती , तारे , ग्रह चन्द्रमा कैसे बने और जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई , यह मनुष्य और वैज्ञानिक जगत के लिए एक कौतुहल का विषय है | वैज्ञानिक और दार्शानिक इस पर बहुत सारे मत दे चुके है परन्तु समय समय पर ये सिद्धांत बदलते रहे है | हममे से बहुतो ने यह सोचा होगा पर कहीं न कहीं जा के अटक गए होंगे और फिर इस विषय को वहीँ छोड़ दिया होगा |

मध्य अफ्रीका मे एक बोसोंगो समाज है , उनके अनुसार महान भगवान बुम्बा ने इस सृष्टि की रचना की है । इनके अनुसार से पहले केवल अंधकार था , जल था और भगवान बुम्बा थे । एक बार भगवान बुम्बा के पेट मे दर्द हुआ तो उन्होंने उल्टी किया । भगवान बुम्बा के उल्टी से सूर्य और कुछ रहने योग्य पृथ्वी का निर्माण हुआ |
भगवान बुम्बा के पेट मे दर्द अभी भी कम नहीं हुआ तो उन्होंने फिर से उल्टी की , उसका असर ये हुआ की चन्द्रमा , तारे, और कुछ जानवर बने या यॊ कहे की कुछ जीव बने जैसे चीता , मगरमच्छ, कछुआ और फिर सबसे अंत मे मानव ।

हं , भगवान बुम्बा ने ये सब कैसे और क्यों बनाया, भगवान बुम्बा कौन है , इनकी उत्पत्ति कैसे, हुई इसका उत्तर नहीं मिला तो हम दूसरे मत की ओर रुख कर लिया । इस खोज के संदर्भ में हमें genisis नामक किताब या यूं कहे Genisis नामक ग्रन्थ पढ़ने का मौका मिला । इसमें विशप अशर के अनुसार ईशा मशीह के ४००४ साल पहले ९ ओक्टुबर की सुबहः में हुई परन्तु यह बहुत शीघ्र परिवर्तन है । मानव के जीवन मे प्राकृतिक वस्तुओं जैसे पहाड़ , नदी ,आदि को देखे तो इतना शीघ्र परिवर्तन नहीं होता है । यहां भी उत्तर की आशा छिड़ हो रही थी पर ऐसा लग रहा था सब कुछ एक बार मे बना है ।

अब आगे चलते है यहां तो मेरे प्रश्नो की शंख्या बढ़ती जा रहीथी , तभी कुछ ग्रीक दार्शनिक के भी मत मिले । ग्रीक दार्शनिक एरिस्टोटल के अनुसार ब्रह्मांड पहले से ही था और सनातन है , कुछ प्राकृतिक आपदा इसे अपने आरम्भ की और ढकेल देती है । पर ये बात कुछ समझ मे नही आई , पृथ्वी , तारे, कैसे बने अब तक ये नही पता चला , परन्तु एक बात समझ आई वो है सनातन , सनातन का मतलब होता है जो कभी नष्ट न हो , हमेशा से हो पर आप देखे तो जो भी है कभी ना कभी नष्ट हो जाता है। अगर ये भी मान ले भगवान ने इसे बनाया है तो वो कहा है और वो इस सृष्टि की रचना से पहले क्या कर रहे थे और इसके नष्ट होने के बाद क्या करेंगे । जेनिसिस १:१ भी यही बोलता है भगवान ने पृथ्वी और स्वर्ग बनाया।

अब आगे चलते है यहां तो मेरे प्रश्नो की शंख्या बढ़ती जा रहीथी , तभी कुछ ग्रीक दार्शनिक के भी मत मिले । ग्रीक दार्शनिक एरिस्टोटल के अनुसार ब्रह्मांड पहले से ही था और सनातन है , कुछ प्राकृतिक आपदा इसे अपने आरम्भ की और ढकेल देती है । पर ये बात कुछ समझ मे नही आई , पृथ्वी , तारे, कैसे बने अब तक ये नही पता चला , परन्तु एक बात समझ आई वो है सनातन , सनातन का मतलब होता है जो कभी नष्ट न हो , हमेशा से हो पर आप देखे तो जो भी है कभी ना कभी नष्ट हो जाता है। अगर ये भी मान ले भगवान ने इसे बनाया है तो वो कहा है और वो इस सृष्टि की रचना से पहले क्या कर रहे थे और इसके नष्ट होने के बाद क्या करेंगे । जेनिसिस १:१ भी यही बोलता है भगवान ने पृथ्वी और स्वर्ग बनाया।

अब हमने नवीनतम वैज्ञानिक अवधरणो के बारे मे खोजना सुरु किया । सबसे पहले हमें मिली थ्योरी ऑफ़ बिग बंग ( theory of big bang ), इस सिद्धांत के अनुसार एक अणु था और उसमे एक विस्फोट हुआ उसका असर ये हुआ की उस अणु मे विस्तार सुरु हुआ और इस ब्रम्हन्ड की रचना हुई। यह सिद्धांत कॉस्मोलॉजी मॉडल पे आधरित है और अवलोकन की अवधारणा है। इसका मतलब है theory of observation . अभी भी हमारे प्रश्नो के उतर नही मिला तो दूसरे सिद्धांत की तरफ चल दिए और ये सिद्धांत है थ्योरी ऑफ़ एमर्जेन्स (theory of emergence ), इसके अनुसार बड़े बड़े बदलाव छोटे छोटे बदलाव से हुए है । अगला सिद्धांत है इनफिनिट -रग्रेस्स (infinite - regress ) इसका मतलब एक अनंत श्रंखला है p1 , p2 , .....,pn -1 , pn . इसके अनुसार p2 के सत्य होने के लिए p1 का सत्य का होना जरूरी है । से बहुत सारे सिद्धांत है जैसे की m - theory , maron cosmology , nataral theory इतय्यादि पर इसमें से किसी ने हमारे प्रश्नो के उत्तर नही मिले। इसके अनुसार अणु पहले से था और आकाश (space) तभी तो इसमें विस्फोट हुआ और ये सब बना पर ये अणु और आकाश कैसे बने इसे देंखेगे अगली श्रंखला मे ।