ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति -3

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति -3

सृष्टि , ब्रह्माण्ड , universe ये कैसे बने , ये धरती , तारे , ग्रह चन्द्रमा कैसे बने और जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई , यह मनुष्य और वैज्ञानिक जगत के लिए एक कौतुहल का विषय है | वैज्ञानिक और दार्शानिक इस पर बहुत सारे मत दे चुके है परन्तु समय समय पर ये सिद्धांत बदलते रहे है | अब तक हमने देखा big bang की theory या हिरण्य गर्भ का सिद्धांत या नाद का सिद्धांत समानांतर चल रही है परन्तु इस श्रृंखला में हम आपको बताएँगे , कैसे आकाश में विस्तार कैसे हुआ और आकाश से कैसे और तत्व बने फिर जीवन ।

आकाश को विभजित नहीं कर सकते कम से कम ना तो कोई सिद्धांत देखने को मिला भले ही परमाणु बम बना लिया गया । और कुछ दिनों पहले ginova में हुए रिसर्च में वैज्ञानिक god particle पे research कर रहे है और बोल रहे है । लेकिन अभी भी ये कण की बात करे उसके लिए इनके मूवमेंट या गति के लिए आकाश की जरूरत है । आकाश को खंडित नहीं किया जा सकता ये सभी आकाश के ही रूपांतरण है । आकाश की उत्पत्ति ब्रह्म से हुई है इसके लिए हमें ब्रह्म को समझना होगा । ब्रह्म शब्द बना है ब्रह धातु से हुई है जिसका मतलब है फैलाव , बढ़ाना या फूटना । तो हिरण्य गर्भ के सिंद्धांत के अनुसार केवल ब्रह्म था और उसकी ऊर्जा या शक्ति थी । फिर उस ब्रह्म में फैलाव शुरू हुआ और उससे अवकाश हुआ यही अवकास आकाश है । पहले यह स्पंदन रहित था फिर इसमें प्राण आया थो इसमें स्पंदन हुआ और फिर आकाश में फैलाव होना सुरु हुआ और इसने सबको अपने में संहित कर लिया । परतु ये सपंदन किस तरह का था इससे क्या हुआ इसके लिए हम आपको इसके गुण शब्द के बारे में बताते है first cosmic sound ॐ । ॐ शब्द बना है तीन कारको से ।
१: आकर : अर्थात सृजन की शक्ति creational power
२: उकार : अर्थात भरण पोषण की शक्ति maintaining power
३: मकार : अर्थात परिवर्तन की शक्ति transformation power
अतः आकाश में ये तीनो गुण(creational power , maintaining /sustaining power और transformation power) है । यही कारण है इस सृष्टि को त्रिगुणी कहते है । तीन गुण वाली ।

आकाश का रूपांतरण से बना वायु तत्व । वायु तत्व बना है संस्कृत के वत धातु से और वत का मतलब है बहाना या चलना और वायु वह है जो सबको चलती है चाहे प्रकाश के कणो को सूर्य से पृथ्वी तक या फिर फोटान को या फिर इलेक्ट्रान को या फिर हमें । वायु गति है । अब हम ऐसे सोचते है डॉक्टर बोलते है किसी रोगी के अंग या पैर में लकवा मर दिया है अर्थात उसकी पैरो की गति समाप्त हो गयी है भले ही ब्लड का फ्लो हो रहो परन्तु वायु ने उसका साथ छोड़ दिया । वायु का गुण है स्पर्श और ये आकाश के गुण शब्द को भी अपने में लिए है । तभी तो जब हवा चलती है तो आप उसे सुन भी सकते हो और उसे अपने इन्द्रियों से स्पर्श का अनुभव भी कर सके हो । आकाश को कर सकते है क्या , नहीं ।

वायु का रूपांतरण अग्नि है और अग्नि का गुण है स्वरूप । बिना तेज के आप देख नहीं सकते वायु को देख सकते हो क्या यह आकाश और वायु के दोनो को भी अपने में समाहित किये हुए है । अग्नि से उतपन्न हुआ जल और इसका गुण है स्वाद/taste । जल से बना पृथ्वी और इसका गुण है गंध या smell । ये सरे तत्व अपने पूर्वर्ती तत्वों के गुणों को अपने में समाहित किये हुए । ये सरे तत्व स्थूल भी है और सूक्ष्म भी । ये सभी आकाश में स्पंदन से बने है ।

अभी हमारे वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे है W and Z bosons में भी भार /mass /weight है । Force Carrier के बात पे शोध चल रहा है इसके अनुसार virtual particle / कण की बारे में सोच रहे है जो विद्युत चुम्बकीय (electromagnetic ) क्षेत्र में गति / movement का कारण है । कहीं ये वायु तत्व की बात तो नहीं कर रहे है चलो उन्हें इस बात पे और शोध करने देते है । परन्तु यह ब्रह्माण्ड इन पांच तत्वों का स्थूल रूप है ।

अब तक हमने जितने भी तत्व बताये आकाश से ले के प्रथ्वी तक ये सब जड़ है परन्तु इसमें चेतन नहीं है । पर ये तो मानना पड़ेगा इसमें अद्भुत त्रि शक्ति है (creation , sustaining, and transforming ) । इसमें जीवन और जीव कहा से आया ये देखेंगे फिर कभी । तब तक के लिए धन्यवाद ।