ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति -2

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति -2

सृष्टि , ब्रह्माण्ड , universe ये कैसे बने , ये धरती , तारे , ग्रह चन्द्रमा कैसे बने और जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई , यह मनुष्य और वैज्ञानिक जगत के लिए एक कौतुहल का विषय है | वैज्ञानिक और दार्शानिक इस पर बहुत सारे मत दे चुके है परन्तु समय समय पर ये सिद्धांत बदलते रहे है | अब तक हमने बहुत सारे सिद्धांत बातये , इस श्रृंखला में हम आपको अब तक की सबसे पुराने ग्रन्थ और ऋग्वेद और हिन्दू ग्रंथो के आधार पर ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति बताएँगे |

सो अभी तक आपने जितने भी सिद्धांत बताये उनके अनुसार या तो भगवान् ने सब बनाया अथवा भगवान् और पदार्थ अस्तित्व साथ साथ है । परन्तु अभी भी ये समझ मे नहीं आया ये अणु क्या है परन्तु हम theory of big bang के अनुसार अणु मे विस्फोट हुआ और उसके विस्तार से भिन्न भिन्न संरचनाये बनती गई। इसका मतलब आकाश भी पहले से था । अभी हम अणु के बारे मे सोच रहे थे अब ये आकाश कहा से आ गया । आकाश भी हिन्दू ऋषि मुनियों की खोज है जो इन्होने इस दुनिया को बताया , इससे पहले जितने भी दर्शन शाश्त्र हुए उसमे आकाश के बारे मे पहले नहीं कुछ सुनाने को मिला ये ईथर (ether) या आकाश का वर्णन सबसे पहले हिन्दू ग्रंथो मे ही मिलता है । हिन्दू ऋषि मुनियों ने सारे सिद्धांत theory of generalisation या यो कहे सार्व भौमिक्ता के सिद्धांत पर दिया है । इसका सबसे पहला वर्णन all relegious meeting मे स्वामी विववेकानंद ने बतया था । तो इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का सन्दर्भ मानव सभ्यता के सबसे पुराने ग्रन्थ ऋग्वेद मे मिलता है और उसे हम हिरण्य गर्भ का सिद्धांत के नाम से जानते है । हिरण्य का मतलब होता है सुनहरा या गोल्डन (Golden) गर्भ का मतलब womb होता है। ये सिद्धांत big bang की theory को भी अपने अंदर समाहित किये हुए है ।

चलो इस सिद्धांत को समझने ने से पहले हम इसमें परिभाषित elementry element अर्थात मूल तत्त्वों के बारे मे जानते है , इसके अनुसार सबसे पहला भौतिक तत्त्व है आकाश , आकाश वह है जो अवकाश प्रदान करता है इसको दूसरे भाषा मे कह सकते है जो भी दो वस्तुओ के बीच का अंतर या गैप/space है उसे आकाश कहते है अर्थात आकाश वह है जो अवकाश प्रदान करता है वह आकाश है । इसका गुण है शब्द या sound| वह मूल ध्वनि ऊं है । यह सौरभौम है यह सबसे बड़ा है समस्त ब्रह्माण्ड को धारण किये हए है और इतना छोटा है की परमाणु (atom) के अंदर भी मौजूद है । विज्ञानं के अनुसार परमाणु इलेक्ट्रान , प्रोट्रान और न्यूट्रॉन से बना है । प्रोट्रान , न्युट्रान नाभि मे रहते है और अभिन्न अवकाश (space) साझा करते है और इलेक्ट्रान उसके चारो ओर चक्कर लगता है । अगर आकाश नहीं होता तो इलेक्ट्रान चक्कर कैसे लगता , दो प्रोट्रान & न्यूट्रॉन के बीच भी गैप है । यही तो आकाश है । सबसे छोटा परमाणु है हाइड्रोजन (hydrogen) है, इसमें एक प्रोट्रान & एक इलेक्ट्रान है , उसके बीच भी तो अवकाश है, गैप है, अर्थात आकाश है। तो इसका अर्थ है आकाश सबसे छोटा तत्त्व भी है और सबसे बड़ा भी । अर्थात आकाश सबसे पहला तत्व है जो इस ब्रह्माण्ड और दूसरा मूल तत्त्व है प्राण , प्राण स्पंदन है या कहे तो vibration है।

या दूसरे शब्दों मे कहे प्राण वह ऊर्जा या energy या बल (force) है जो स्पंदन प्रदान करती है । अगर इसका व्यापीकरण (generalization) करे प्राण खुद मे एक movement या गति है चाहे इलेक्ट्रान की गति हो या फोटोन की गति हो वह प्राण है । इसी सिद्धांत के आगे प्राण को नियंत्रित करने के लिए योगियों ने प्राणायाम और सारे योग सिद्धांत दिए । अतः जितने भी अलग अलग स्पंदन प्रकाशित हो रहा है है वह प्राण है । इस ब्रह्माण्ड मे जो भी है वह आकाश और प्राण है । अब हम पदार्थ के बारे मे समझ ले , आकाश और प्राण का प्रष्फुटन का परिणाम ही पदार्थ या द्रव्य है । जो हमें स्थूल रूप मे दीखता है अतः सबसे पहले आकाश था और उसमे स्पंदन हुआ और उसमे विस्तार शुरू हुआ जिससे ये ब्रह्माण्ड बना , यही तो big bang की theory भी है और यही हिरण्य गर्भ का सिद्धांत भी है ।

अब नाद और बिंदु का सिद्धांत देखते है इसके अनुसार एक बिंदु था और उसमे ध्वनि उत्पन्न हुई जिसका परिणाम यह ब्रह्माण्ड है और वह मूल ध्वनि और कुछ नहीं बल्कि ॐ है यह भी big bang theory की तरह है । यह सिद्धांत यह भी बोलता है की ब्रह्माण्ड का विस्तार linear न हो के circular है । इस सिद्धांत के अनुसार प्राण अथवा energy के तीन प्रकार है अर्थात creation , adhere और destroy । पहले आकाश motionless या अपरिवर्तनीय था और उसमे प्राण के द्वारा गति (motion) हुआ । अगली श्रंखला मे देखेंगे आकाश मे परिवर्तन आने पे क्या हुआ ।